रामकृष्ण मिशन अस्पताल मार्ग की नजूल भूमि पर हरिद्वार रूड़की विकास प्राधिकरण का उदासीन रवैया ,
सबसे बड़ा सवाल—सरकारी नजूल भूमि की सुरक्षा कौन करेगा?
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हरिद्वार। कनखल स्थित रामकृष्ण मिशन अस्पताल मार्ग की नजूल भूमि को लेकर हरिद्वार रूड़की विकास प्राधिकरण अधिकारियों ने उदासीन रवैया इख्तियार किया हुआ है।यदि प्रशासनिक रिकॉर्ड में भूमि को राजकीय नजूल भूमि बताया गया है, तो उसका संरक्षण संबंधित सरकारी विभागों की जिम्मेदारी बनती है। 
प्रशासनिक पत्राचार, राजस्व संबंधी उल्लेख, मानचित्र स्वीकृति से जुड़े दस्तावेज और ई-स्टाम्प की तस्वीरें सामने आने के बाद अब पूरे प्रकरण को गंभीर जांच के दायरे में खड़ा करती हैं।
उपलब्ध दस्तावेजों में भूमि को खसरा संख्या 245/7, खेवट संख्या 23 तथा लगभग 11 बीघा 14 बिस्वा क्षेत्रफल वाली राजकीय नजूल भूमि के रूप में वर्णित किए जाने का उल्लेख है।
मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि एक ओर प्रशासनिक पत्राचार में उक्त भूमि की नजूल प्रकृति और उसके संरक्षण की बात सामने आती है, वहीं दूसरी ओर अलग-अलग दस्तावेजों में ततीमा, खसरा संख्या और मानचित्र स्वीकृति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में पूरे रिकॉर्ड का मूल अभिलेखों से मिलान कराना जरूरी हो गया है।
1. प्रशासनिक पत्र में नजूल भूमि का स्पष्ट उल्लेख
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उपलब्ध पत्र में रामकृष्ण मिशन अस्पताल मार्ग स्थित खसरा संख्या 245/7, खेवट संख्या 23 को राजकीय नजूल भूमि से संबंधित बताया गया है। पत्राचार में नजूल भूमि की स्थिति/प्रकृति की जानकारी प्राप्त करने तथा संबंधित शिकायत की जांच का संदर्भ भी दिखाई देता है।
यदि यह अभिलेख आधिकारिक जांच अथवा राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर तैयार हुआ है, तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि बाद के किसी मानचित्र, ततीमे अथवा निजी लेनदेन में उक्त भूमि की पहचान किस आधार पर की गई?
2. वर्ष 2015 की शिकायत और कार्रवाई का सवाल
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दस्तावेज के दूसरे पृष्ठ में वर्ष 2015 में सूचना आयोग के माध्यम से नजूल भूमि को खुर्द-बुर्द करने वाले लोगों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार को मामला भेजे जाने का उल्लेख दिखाई देता है। इसमें नजूल भूमि की खरीद-फरोख्त और सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण को लेकर चिंता व्यक्त किए जाने की बात भी दर्ज है।
इससे यह सवाल पैदा होता है कि यदि इतनी पुरानी शिकायत और सरकारी स्तर पर पत्राचार मौजूद था, तो उसके बाद भूमि की स्थिति पर प्रभावी कार्रवाई अथवा नियमित निगरानी क्यों नहीं हुई?
3. नजूल भूमि पर प्लॉटिंग और निर्माण का उल्लेख
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उपलब्ध जांच/पत्राचार में मौके पर आवासीय प्लॉटिंग और निर्माण जैसी गतिविधियों का भी उल्लेख दिखाई देता है। साथ ही भूमि की सीमा, आसपास के पुराने निर्माण और मौके की स्थिति का विवरण दिया गया है।
4. खसरा 24 और 42 के ततीमे का सवाल अब और गंभीर
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मामले में उठाया जा रहा सवाल केवल खसरा 245/7 तक सीमित नहीं है। पहले उपलब्ध ई-स्टाम्प में शांतनु शर्मा और सुनील कुमार अग्रवाल के नाम पक्षकार के रूप में दिखाई देते हैं तथा दस्तावेज में 02 सितंबर 2023 की तारीख, Article 34(A) instrument और ₹100 स्टाम्प ड्यूटी का उल्लेख है।
