कंपनी में उत्पादन बंद होने के बाद श्रमिकों के रोजगार पर संकट ,कंपनी प्रबंधन पर लगाया शोषण का आरोप
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श्रमिकों के प्रवेश वर्जित का गेट पर नोटिस किया चस्पा, श्रमिकों को सिक्योरिटी ने रोका, जनेका हेल्थकेयर में विवाद गहराया
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आदित्य शर्मा (संवाददाता)हरिद्वार। रानीपुर भेल स्थित एंसिलरी जनेका हेल्थकेयर लिमिटेड में कंपनी प्रबंधन की ओर से 30 सितंबर 2026 को नोटिस चस्पा किए जाने के बाद कर्मचारियों की नौकरी और कंपनी में उत्पादन बंद किए जाने को लेकर विवाद और गहरा गया है।
चस्पा किए गए नोटिस में कहा गया है कि अतिरिक्त निदेशक दीपक कुकरेजा का कार्यकाल 30 सितंबर 2026 को समाप्त हो गया है तथा ड्रग कंट्रोलर, देहरादून, उत्तराखंड के आदेश के अनुसार अगामी आदेश तक कंपनी का प्रोडक्शन बंद रहेगा। नोटिस में कर्मचारियों को 1 अक्टूबर 2026 से कंपनी बंद रहने की सूचना दी गई है और प्रवेश पर रोक की बात कही गई है।
मामले को और गंभीर बनाने वाला आरोप यह है कि 1 अक्टूबर को काम पर पहुंचे श्रमिकों को कंपनी के गेट पर ही सिक्योरिटी गार्ड द्वारा रोक दिया गया। बृहस्पतिवार को कंपनी कर्मचारियों को अंदर प्रवेश नहीं दिया गया और उन्हें चस्पा नोटिस के आधार पर कंपनी परिसर में जाने से रोक दिया गया। जिसके बाद श्रमिकों ने गेट पर ही धरना दे दिया और कंपनी प्रबंधन से वेतन, पीएफ, ग्रेच्युटी की दिलाए जाने की मांग की।
सूत्र बताते हैं कि बृहस्पतिवार को कंपनी के बाहर उत्पादन बंद का नोटिस चस्पा कंपनी से पूर्व में इस्तीफा देने वाले कुछ श्रमिकों को बुलाकर कंपनी के अंदर लेकर काम कराया जा रहा था , जिसकी शिकायत ड्रग कंट्रोलर से किए जाने के बाद उन श्रमिकों को भी कंपनी से बाहर निकाला गया।
इस घटनाक्रम के बीच इंटक उत्तराखंड की ओर से 29 सितंबर को सहायक श्रमायुक्त, हरिद्वार को पत्र देकर कर्मचारियों के हितों की रक्षा तथा श्रम कानून के अनुरूप कार्रवाई की मांग की गई।
कर्मचारियों की ओर से श्रमिक संगठन इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस उत्तराखण्ड प्रदेश अध्यक्ष अधिवक्ता राकेश राजपूत को शिकायत दी गई, जिसके आधार पर 29 सितंबर 2026 को सहायक श्रमायुक्त, रोशनाबाद, हरिद्वार को पत्र भेजा गया हैं।
पत्र में दावा किया गया है कि कंपनी के कर्मचारियों को 30 सितंबर 2026 से कंपनी बंद किए जाने की जानकारी दी गई, जबकि कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें इसके संबंध में पर्याप्त पूर्व सूचना नहीं दी गई। पत्र में कर्मचारियों को वेतन, ग्रेच्युटी, फंड आदि के भुगतान तथा रोजगार की स्थिति को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है।
अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उत्पादन बंद होने के साथ कर्मचारियों का रोजगार भी स्वतः समाप्त माना जाएगा? अथवा कंपनी केवल उत्पादन बंद रखकर नियामकीय आदेश का पालन कर रही है? इसका स्पष्ट जवाब कंपनी प्रबंधन और संबंधित श्रम एवं औषधि नियंत्रण विभाग से सामने आना जरूरी है।
अब जांच के केंद्र में ये सवाल
ड्रग कंट्रोलर ने कंपनी को उत्पादन बंद करने का आदेश किस कारण और किस अवधि के लिए दिया?
क्या आदेश की प्रति कर्मचारियों अथवा श्रम विभाग को उपलब्ध कराई गई?
उत्पादन बंद है या पूरा प्रतिष्ठान/रोजगार भी बंद किया गया है?
कर्मचारियों को गेट पर रोकने का लिखित आदेश किस अधिकारी ने दिया?
कर्मचारियों के वेतन, ग्रेच्युटी, पीएफ तथा अन्य वैधानिक देयों की स्थिति क्या है?
क्या कंपनी ने श्रम विभाग को बंदी अथवा कर्मचारियों की सेवा समाप्ति संबंधी कोई वैधानिक सूचना दी है?
यदि केवल उत्पादन बंद करने का आदेश है, तो कर्मचारियों को परिसर में प्रवेश से रोकने का आधार क्या है?
मामला अब सिर्फ कंपनी में उत्पादन बंद होने का नहीं, बल्कि लगभग दो दशक से कार्यरत बताए जा रहे कर्मचारियों के रोजगार और वैधानिक अधिकारों का भी बन गया है।
धरना देने वाले श्रमिकों में हैप्पी शर्मा , राजेश कुमार, दीपक कुमार, सीमा भट्ट , आरती पासवान आदि शामिल रहे।
