सहायक अभियंता पंकज पाठक का फर्जी मैप अपलोड किए जाने का मामले ने पकड़ा खासा तूल
सहायक अभियंता पंकज पाठक के विरुद्ध विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि और निलंबन की संस्तुति के बावजूद पदोन्नति में शिथिलीकरण का मामला चर्चा में,
हरिद्वार/देहरादून। पंकज पाठक ने न सिर्फ टिहरी ही बल्कि हरिद्वार -रूड़की विकास प्राधिकरण में भी एई के पद पर रहते हुए ऐसे कई मानचित्र नियम एवं मानकों के विपरीत स्वीकृत किए गए हैं जोकि उत्तराखण्ड नगर एवं ग्राम नियोजन तथा विकास अधिनियम, 1973 के बायलॉज के नियम विरूद्ध हैं। इसी के चलते एचआरडीए के उपाध्यक्ष रहते दीपक रावत आईएएस ने पंकज पाठक की कार्यप्रणाली को लेकर केवल गंभीर टिप्पणी ही नहीं की थी, बल्कि पाठक को मूल विभाग/ सिंचाई विभाग में कार्यमुक्त किए जाने के लिए उत्तराखण्ड शासन को संस्तुति पत्र भी लिखा था। तब सिंचाई विभाग से प्रतिनियुक्ति पर आए पंकज पाठक को दीपक रावत के इस पत्र के खिलाफ हाईकोर्ट में रिट दायर करके अपनी प्रतिनियुक्ति को बचाया था। इतना सब कुछ होने के पश्चात भी पंकज पाठक की कार्यशैली में कोई सुधार नहीं आया और उन्होंने एक के बाद एक मानकों एवं नियमों को ताक पर रख कर अनाप-शनाप तरीके से मानचित्र स्वीकृत करने का सिलसिला जारी रखा। 2023 में मुख्यमंत्री कार्यालय में पंकज पाठक की कार्यशैली और भ्रष्टाचार को लेकर की गई शिकायत में निजी सचिव मुख्यमंत्री आर.मिनाक्षी सुन्दरम द्वारा कार्रवाही के लिए डीएम हरिद्वार को पत्र भेजा गया था, परन्तु सीएम कार्यालय के पत्र को भी पंकज पाठक के रहनुमाओं ने ठंडे बस्ते में डाल दिया। यही नहीं यदि कोई कार्रवाही अधिकारियों द्वारा पंकज पाठक के विरूद्ध की भी जाती हैं तो शासन में बैठे उच्च अधिकारी अपनी दुधारू गाय के कृत्यों पर सहभागिता से पर्दा डाल देते हैं। यही प्रमुख कारण हैं कि आज तक पंकज पाठक द्वारा नियम एवं मानकों के विपरीत किए गए मानचित्रों को न तो निरस्त किए जाने की कार्रवाही की गई हैं और न ही पंकज पाठक के विरूद्ध अभी तक कोई ठोस कार्रवाही को शासन द्वारा अंजाम दिया जा सका हैं। इसके पीछे की मुख्य वजह सत्तारूढ़ दल में परिवार के लोगों का होना तथा उत्तराखण्ड में कबीना मंत्री तथा मुख्यमंत्री के पूर्व निजी सचिव एवं तत्कालीन कमिश्नर रहे एक उच्च अधिकारी का खासा करीबी होना भी बताया जा रहा हैं।
सूत्रों की मानें तो प्रदेश में पूर्व त्रिवेन्द्र सरकार में कबीना मंत्री ने पंकज पाठक को सिंचाई विभाग से हरिद्वार-रूड़की विकास प्राधिकरण में प्रतिनियुक्ति के लिए खासा प्रयास किया था। जिसके परिणामस्वरूप पंकज पाठक द्वारा खुलेआम प्रदेश में जीरो टालरेंस की न सिर्फ धज्जियां उड़ाई जा रही है, बल्कि राजस्व को भी क्षति पहुंचाने का काम किया जा रहा हैं।
अब एक बार फिर टिहरी के सहायक अभियंता पंकज पाठक का फर्जी मैप अपलोड किए जाने का मामले ने खासा तूल पकड़ा हुआ हैं। मामला प्रमुख अखबारों और टीवी चैनलों पर खासा सुर्खियों भरा रहा। समाचारों में प्रकाशित खबरों में बताया गया कि मामले का खुलासा मुख्यमंत्री कार्यालय से हुई गोपनीय जांच में हुआ।
जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण, टिहरी में मानचित्र स्वीकृति से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का मामला अब केवल विभागीय अनियमितता तक सीमित नहीं रह गया है। मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक शिकायत पहुंचने, गोपनीय जांच कराए जाने, विभागीय कार्रवाई की संस्तुति और अब पदोन्नति के लिए सत्यनिष्ठा प्रमाणपत्र जारी करने से इनकार किए जाने तक पहुंच गया है।
जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण टिहरी में एक व्यावसायिक भवन के मानचित्र से जुड़ा कथित फर्जीवाड़ा अब गंभीर प्रशासनिक और विभागीय विवाद का रूप ले चुका है। मामला केवल स्वीकृत नक्शे में बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि आखिर सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना मूल स्वीकृत मानचित्र को हटाकर दूसरा नक्शा ऑनलाइन पोर्टल पर कैसे अपलोड कर दिया गया?
बताते चलें कि हाल ही के दिनों में टिहरी जिला विकास प्राधिकरण के सहायक अभियंता पंकज पाठक ने एक व्यावसायिक भवन के निर्माण के लिए स्वीकृत मानचित्र को बदलकर उसकी जगह कथित रूप से दूसरा कूटरचित नक्शा ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किए जाने का मामला सामने आया था। मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय से की गई गोपनीय जांच का भी उल्लेख है। शिकायत और जांच के बाद प्राधिकरण स्तर पर हलचल बढ़ी और जिसके बाद संबंधित सहायक अभियंता पंकज पाठक से स्पष्टीकरण मांगा गया। पंकज पाठक ने अपने स्पष्टीकरण में कथन किया हैं कि मेरे द्वारा निर्गत मानचित्र में किसी प्रकार का कोई कूटरचित दस्तावेज तैयार नही किया गया हैं। साथ ही प्राधिकरण को कोई वित्तीय हानि नहीं पहुंचाई गई हैं। अपितु समयांतर्गत मानचित्र जारी करने से पूर्व भूलवश हुई त्रुटि का सुधार कर लिया गया हैं।
मूल नक्शे में भी नियमों की अनदेखी का सवाल
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स्वीकृत मूल मानचित्र भवन उपविधि, 2011 (संशोधित-2024) के मानकों के अनुरूप नहीं होने के सवालों के घेरे में आया। स्वीकृत मानचित्र में स्टिल्ट पार्किंग और बेसमेंट के अनिवार्य प्रावधानों को लेकर भी आपत्ति उठाई गई। आरोप है कि पहले नियमों को ताक पर रखकर नक्शा पास किया गया और बाद में मनमाना निर्माण कराने के लिए दूसरा नक्शा पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया।
प्रकाशित रिपोर्ट में ऑनलाइन पोर्टल से मूल नक्शा हटाकर उसकी जगह दूसरा नक्शा अपलोड किए जाने का उल्लेख है। यदि यह तथ्य विभागीय अभिलेखों से प्रमाणित होता है तो यह केवल तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि स्वीकृत मानचित्र और ऑनलाइन रिकॉर्ड की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर मामला होगा।
मुख्यमंत्री कार्यालय की जांच के बाद विभागीय कार्रवाई
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इस प्रकरण में मुख्यमंत्री कार्यालय तक शिकायत पहुंचने और गोपनीय जांच कराए जाने की बात सामने आई है। इसके बाद प्राधिकरण ने संबंधित सहायक अभियंता से जवाब तलब किया। प्रकाशित समाचार के मुताबिक, उपाध्यक्ष डीपी सिंह ने चेतावनी दी थी कि तीन दिन के भीतर संतोषजनक और साक्ष्य आधारित जवाब नहीं मिलने पर उत्तराखण्ड सरकारी सेवक नियमावली के तहत अनुशासनात्मक एवं विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी जाएगी।
वहीं, प्राधिकरण के 16, 19 और 22 सितंबर 2026 के विभागीय पत्रों में भी मानचित्र परिवर्तन, सक्षम स्वीकृति के अभिलेखों की अनुपलब्धता तथा अनधिकृत निर्माण के मामलों में प्रभावी कार्रवाई न किए जाने जैसे गंभीर बिंदु उठाए गए हैं। 22 सितंबर की विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि और सत्यनिष्ठा प्रमाणपत्र देने से इनकार किए जाने की खबर ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि और निलंबन की संस्तुति
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प्राधिकरण के 22 सितंबर 2026 के विभागीय पत्राचार में पंकज पाठक के विरुद्ध गंभीर प्रशासनिक आरोपों का उल्लेख करते हुए विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई। इसके अतिरिक्त 3 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार उपाध्यक्ष ने उनके सेवा अभिलेख में विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज करने का निर्णय लिया। प्राधिकरण की ओर से उठाए गए सवालों में स्वीकृत मानचित्र में सक्षम अनुमति के बिना परिवर्तन, अभिलेखों की प्रामाणिकता, सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण और अनधिकृत निर्माणों पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं होना शामिल है। यह भी उल्लेखनीय है कि प्राधिकरण ने विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि को सेवा पुस्तिका में दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
एक तरफ कार्रवाई की संस्तुति, दूसरी तरफ पदोन्नति में शिथिलीकरण!
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इस पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा सवाल पदोन्नति को लेकर है। जब संबंधित अधिकारी के विरुद्ध विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज की गई हो, सत्यनिष्ठा प्रमाणपत्र देने से इनकार किया गया हो और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति भी शासन को भेजी गई हो, तो फिर पदोन्नति में शिथिलीकरण का प्रस्ताव किस आधार पर विचाराधीन है?
साथ ही पंकज पाठक पर मुख्यमंत्री के नाम से पैसे मांगे जाने के लगे आरोपों से मुख्यमंत्री सहित पार्टी की छवि भी धूमिल हो रही हैं। अब देखना होगा कि शासन इस पूरे मामले में पंकज पाठक के खिलाफ क्या कड़ा एक्शन लेता हैं?
