
हरे पेड़ों पर कालोनी काटे जाने के लिए होता अवैध कटान
बहादराबाद ग्राम समाज की जमीन के विनिमय पर उठे गंभीर सवाल,
मामले में हाईकोर्ट के यथास्थिति के आदेष !
ग्राम समाज की बेशकीमती बाग भूमि का विनिमय-किसके हित में और किस आधार पर?
अनिल कुमार बिष्ट/ हरिद्वार। ग्राम सभा की सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और घोटालों में नेताओं, अधिकारियों और कॉलोनाइजरों का गठजोड़ एक गंभीर समस्या बना हुआ है। हाल के समय में देश के विभिन्न राज्यों से ऐसे कई बड़े मामले सामने आए हैं, जहां भू-माफियाओं ने सरकारी अमले के साथ मिलकर करोड़ों का खेल खेला है। ताजा मामला हरिद्वार के बहादराबाद ग्राम सभा का हैं। जहां ग्रामीणों ने बाग भूमि विनिमय किए जाने में भ्रष्टाचार किए जाने के आरोप लगाए हैं और मामले को लेकर हाईकोर्ट रिट याचिका दायर की हैं।
बहादराबाद की ग्राम समाज की भूमि के कथित विनिमय का मामला अब महज राजस्व अभिलेखों की प्रविष्टियों तक सीमित नहीं रह गया है। उपलब्ध राजस्व परिषद के आदेश में खसरा संख्या 325/2, रकबा 1.0090 हेक्टेयर की ग्राम समाज की भूमि तथा उसके बदले दी गई बंजर भूमि खसरा संख्या 371/2 मिन व 373 मिन, कुल रकबा 1.0400 हेक्टेयर भूमि को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आते हैं।
बड़ा खेल बाग भूमि के बदले बंजर भूमि ?
आदेश में आरोप/दावा सामने आता है कि ग्राम सभा की भूमि बाग के रूप में दर्ज थी और उस बाग भूमि पर दर्जनों फलदार पेड़ लगे हुए थे। इसी बाग भूमि पर लगे हरे-भरे फलदार पेड़ों सेे ग्राम सभा को आय होती थी। जिन्हे विनिमय और विक्रय पष्चात दषहरे से एक दिन पहले आरियां चलवाकर कटवा दिया गया। इतना ही नहीं बाग भूमि के विनिमय में बड़ा खेल होने की आषंका उत्पन्न होने की वजह स्वाभाविक हैं क्योंकि हरे-भरे बाग के स्थान पर विनिमय में प्राप्त भूमि राजस्व अभिलेखों में बंजर श्रेणी में दर्ज बताई गई है।
यदि एक भूमि राष्ट्रीय राजमार्ग के निकट और दूसरी उससे लगभग दो किलोमीटर अंदर है, तो दोनों की वास्तविक बाजार कीमत, लोकेशन, पहुंच मार्ग और भविष्य की उपयोगिता का स्वतंत्र मूल्यांकन होना चाहिए। इस पूरे प्रकरण में केवल सरकारी सर्किल रेट पर्याप्त नहीं हो सकता। जांच का विषय यह होना चाहिए कि विनिमय के समय दोनों जमीनों का वास्तविक बाजार मूल्य कितना था और क्या ग्राम समाज को आर्थिक रूप से नुकसान हुआ। अगर सार्वजनिक संपत्ति कम मूल्य वाली भूमि के बदले अधिक मूल्यवान भूमि देकर विनिमय की गई, तो यह केवल राजस्व प्रक्रिया का सवाल नहीं, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा का गंभीर प्रश्न बन जाता है।
06 फरवरी 2023 का प्रस्ताव भी जांच के घेरे में !
भूमि प्रबन्धन समिति द्वारा 06.02.2023 को प्रस्ताव पारित किए जाने का उल्लेख सामने आया है। इसलिए अब यह सवाल महत्वपूर्ण है कि प्रस्ताव किस आधार पर तैयार हुआ, बैठक में कौन-कौन मौजूद थे, किसने सहमति दी और सक्षम अधिकारी ने किस आधार पर इसे मंजूरी दी?
मौजा बहादराबाद, परगना ज्वालापुर, तहसील व जिला हरिद्वार की ग्राम सभा की बाग भूमि खसरा नं. 325/2 रकबा 1.0090 हेक्टेयर जो दिल्ली-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है और जिससे ग्राम सभा को हर साल लाखों रुपये बाग की आय होती थी, उसे भूमि प्रबंधक समिति ने दिनांक 06.02.2023 को प्रस्ताव पारित कर निजी भूमि खसरा 371/2 मिन. (0.69 हे.) व 373 मिन. (0.35 हे.) कुल 1.04 हे. जो बंजर श्रेणी 5(3)(ड) की है और राजमार्ग से 2 किमी अंदर है, से विनिमय कर दिया।
आरोप है कि ग्राम प्रधान ने मिलीभगत से भू-माफियाओं के साथ साठगांठ कर यह विनिमय किया, जिससे ग्राम सभा को लगभग 50 करोड़ रुपये की आर्थिक हानि हुई। विनिमय के बाद संयुक्त खाते की भूमि का बंटवारा भी नहीं हुआ और सह-खातेदारों की सहमति नहीं ली गई।
उत्तरखण्ड स्तम्भ की टीम ने मौका स्थलीय एवं अभिलेखों की जांच पड़ताल की, जिसमें सामने आया कि बहादराबाद ग्राम सभा से ली गई भूमि को विपक्षी प्रवेश कुमारी पत्नी सोम सिंह द्वारा विनिमय के मात्र 4 दिन बाद 02.04.2024 को 3.33 करोड़ में कॉलोनाइजर अभिषेक त्यागी को बेच दिया गया और कॉलोनाइजर अभिषेक त्यागी द्वारा मौके पर प्लॉटिंग शुरू कर दी गई।
कमाल देखिए जहां एक ओर विनिमय की गई बाग भूमि पर कालोनी काटकर भूखंड विक्रय करने का कार्य चलता रहा तो वहीं दूसरी ओर ग्राम सभा को आज तक विनिमय की गई बंजर श्रेणी की भूमि पर कब्जा नहीं मिल पाया हैं।
उप जिलाधिकारी हरिद्वार ने वाद सं. 01/2022-23 में दिनांक 28.03.2024 को विनिमय को स्वीकृत किया। इसके विरुद्ध ग्रामीण अभिषेक पुत्र प्रताप सिंह व अन्य ने आयुक्त गढ़वाल मंडल में अपील सं. 20/2024-25 दायर की। आयुक्त गढ़वाल ने दिनांक 20.12.2025 को आदेश पारित कर माना कि विनिमय में भ्रष्टाचार के तथ्य हैं और जिलाधिकारी हरिद्वार को 1 माह में 8 बिंदुओं पर जांच का निर्देश दिया था।
जिसके विरुद्ध ग्रामीण अभिषेक आदि ने राजस्व परिषद उत्तराखंड, देहरादून में अपील संख्या. 44/2026 दायर की । राजस्व राजस्व परिषद उत्तराखंड, देहरादून से बाग भूमि संबंधी दिए निर्णय से संतुष्ट न होने के बाद बहादराबाद के ग्रामीण अभिषेक, विनोद कुमार, उमेष कुुमार एवं सूरज पाल द्वारा मामले में उच्च न्यायालय नैनीताल में रिट याचिका दायर की गई थी।
माननीय उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल में रिट याचिका डब्ल्यूपीएमएस /2714/2026 अभिषेक व अन्य बनाम उत्तराखंड सरकार में सुनवाई हुई। मामले माननीय न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी ने दिनांक 15.09.2026 को अंतरिम आदेश दिया हैं।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सुदानंद ब्रह्मचारी एवं मनीष गौरव चौहान ने बताया कि हाई कोर्ट ने विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने और कोई तीसरा पक्ष हित सृजित नहीं किया जाएगा के आदेष पारित किए हैं। जिसमें अगली सुनवाई 26.10.2026 को नियत है।
उल्लेखनीय हैं कि राजस्व विभाग द्वारा ग्राम सभा की बाग भूमि विनिमय किए जाने के मामले को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के समक्ष चुनौती दी गई हैं। जिसमें उत्तराखण्ड स्टेट , जिला अधिकारी, हरिद्वार , भूमि प्रबन्धन समिति, ग्राम प्रधान ,प्रवेष कुमारी एवं कॉलोनाइजर अभिषेक त्यागी को प्रतिवादी बनाया गया हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि हाईकोर्ट के यथास्थिति आदेश के अनुपालन में ग्राम सभा की भूमि पर हो रही प्लॉटिंग, निर्माण और नामांतरण पर तत्काल रोक लगाई जाए और दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जाए।
सूत्र बताते हैं कि इस बाग भूमि के खेल में सत्ताधारी पार्टी नेताओं सहित ग्राम सभा के कुछ सदस्यों ने भी बाग भूमि को उजाड़ने में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लाभ लिया है। बाग भूमि का विनिमय किए जाने के मामले में हाईकोर्ट में यथास्थिति एवं मामले से संबंधित प्रतिवादीगणों से जबाव मांगे जाने के आदेष पारित होने के बाद से ग्रामीणों में खुषी की लहर हैं साथ ही ग्रामीणों ने मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी षिवानंद सरस्वती महाराज एवं मातृ सदन के अन्य संतों का बाग भूमि बचाने के लिए किए जा रहे सहयोग के लिए विषेष आभार व्यक्त किया हैं।
बताते चलें कि इसी भूमि से लगी सहारा लैंड की भूमि थी, जिसकों कॉलोनाइजर द्वारा खरीद की गई थी, जोकि बहादराबाद हाईवे के बिलकुल समीप हैं। यह भी महत्वपूर्ण हैं कि जिस कॉलोनाइजर ने अधिराज कुंज ने नाम से कालोनी काटी हुई है, उसी कालोनाईजर ने इस बाग भूमि को प्रवेष कुमारी से क्रय की हैं। बताया जा रहा हैं कि यथास्थिति के आदेषांे से पूर्व विवादित बाग भूमि पर कालोनाईजर द्वारा कई प्लाट विक्रय किए जा चुकें हैं।
हलांकि मामला अब उच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं परन्तु सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि 325/2 वास्तव में ग्राम सभा की बाग भूमि थी, तो उसके विनिमय का आधार और सार्वजनिक हित क्या था ? और बाद में विनिमय भूमि को कॉलोनाइजर को विक्रय कर कालोनी काटे जाने में कौन-सा सार्वजनिक हित था ?
फिलहाल, मामला हाईकोर्ट उच्च न्यायालय पहुंच गया हैं। जिसमें हाई कोर्ट ने यथास्थिति का आदेष पारित कर दिया हैं और प्रतिवादीगणों को नोटिस जारी कर अगामी सुनवाई की तिथि पर अपना जबाव देने संबंधी आदेष पारित किया हैं।
मामला उच्च न्यायालय में विचारधीन हैं अब देखना होगा कि मामले में आगे क्या होता हैं।
