हरिद्वार। खसरा संख्या 48/1 की कथित ट्रस्ट भूमि पर व्यावसायिक निर्माण को लेकर अब एक महत्वपूर्ण सवाल सामने आया है। जानकारी के अनुसार 2 जनवरी 2026 को हरे राम आश्रम की दो दुकानों को एचआरडीए अधिकारियों द्वारा सील किया गया था, लेकिन वर्तमान तक उन दुकानों/निर्माण का मानचित्र कम्पाउण्ड या शमन नहीं किया गया है।
ऐसी स्थिति में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब निर्माण की वैधता अभी तक शमन के माध्यम से नियमित नहीं हुई, तो क्या इन दुकानों को अधिभोग अथवा व्यावसायिक उपयोग में लाने की अनुमति थी?
सीलिंग के बावजूद स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं?
उत्तराखंड नगरीय एवं ग्राम नियोजन तथा विकास अधिनियम, 1973 की धारा 15-क के अनुसार स्वीकृत योजना के अनुसार विकास पूरा होने पर पूर्णता प्रमाण-पत्र प्राप्त करने की व्यवस्था है। वाणिज्यिक भवन को अधिभोग में लेने या उसका उपयोग कराने पर भी धारा 15-क में प्रतिबंध है, जब तक निर्धारित शर्तों के अनुसार पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी न हो जाए।
2 जनवरी 2026 की सीलिंग के बाद:
क्या दुकानों की सील आज तक बरकरार है?
क्या सीलिंग के बाद कोई शमन आवेदन दिया गया?
क्या शमन आवेदन पर कोई आदेश पारित हुआ?
यदि शमन नहीं हुआ तो निर्माण को वैध मानने का आधार क्या है?
क्या पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी हुआ?
यदि पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी नहीं हुआ तो दुकानों का अधिभोग किस आधार पर हुआ?
क्या सील की गई दुकानों में वर्तमान में व्यावसायिक गतिविधि संचालित हो रही है?
क्या सील हटाने का कोई सक्षम आदेश जारी हुआ है?
2 जनवरी को सीलिंग हुई थी और २४ सितम्बर तक कम्पाउण्डिंग नहीं हुई, तो प्रशासनिक जांच का विषय यह बनता है कि सीलिंग के बाद निर्माण की स्थिति क्या रही और क्या किसी अधिकारी द्वारा सील खोलने अथवा उपयोग की अनुमति देने संबंधी आदेश दिया गया।
सबसे बड़ा सवाल
“जब 2 जनवरी 2026 को एचआरडीए ने दो दुकानों को सील किया और आज तक उनका मानचित्र कम्पाउण्ड नहीं हुआ, तो फिर उन दुकानों को अधिभोग अथवा व्यावसायिक उपयोग में कैसे लाया गया?”
यह सवाल केवल भवन निर्माण का नहीं, बल्कि पूर्णता प्रमाण-पत्र, अधिभोग, सीलिंग आदेश और शमन प्रक्रिया के अनुपालन का है।
वहीं एच आर डी ए अधिकारियों ने मामला संज्ञान में आते ही पूरे मामले की जांच कर जल्द कार्रवाई करने की बात कही है।
